ऋषिकेश एक और यात्रा
सफर तो मेरी जिंदगी है, लेकिन कुछ रास्ते ऐसे होते हैं जो मंजिल तक पहुँचने के बाद भी खत्म नहीं होते, बल्कि हमारे अंदर बस जाते हैं। ऋषिकेश मेरे लिए वैसी ही एक जगह है।
हजारों किलोमीटर की यात्रा और 'भारत एकता यात्रा' के दौरान मैंने बहुत कुछ देखा, पर ऋषिकेश की उस ठंडी हवा में जो अपनापन है, वो कहीं और नहीं। जब मैं ऋषिकेश की गलियों में निकलता हूँ, तो मुझे एहसास होता है कि यहाँ का हर पत्थर एक कहानी कहता है। आइए, आपको ले चलता हूँ मेरे नजरिए से ऋषिकेश के उस सफर पर, जहाँ भक्ति, शांति और प्रकृति का अनूठा संगम है।
झूलों का शहर: राम, लक्ष्मण और जानकी झूला
ऋषिकेश की पहचान यहाँ के झूलों से है। लक्ष्मण झूला पर खड़े होकर जब नीचे बहती गंगा को देखो, तो ऐसा लगता है जैसे वक्त थम गया हो। वहीं राम झूला की चहल-पहल और वहाँ के संतों की टोली एक अलग ही ऊर्जा देती है।
लेकिन इस बार मेरा दिल जीता जानकी झूला ने। यह नया बना पुल आधुनिकता और आस्था का सुंदर मेल है। यहाँ से पूरी ऋषिकेश घाटी का जो नज़ारा दिखता है, वो किसी फिल्म के सीन जैसा लगता है। इन झूलों पर चलते हुए जब हवा के झोंके चेहरे को छूते हैं, तो लगता है कि मुसाफिर होना दुनिया का सबसे खूबसूरत काम है।
परमार्थ निकेतन और महादेव की विशाल मूर्ति
जब आप राम झूला पार करके परमार्थ निकेतन की ओर बढ़ते हैं, तो आश्रम की दिव्यता आपको अपनी ओर खींच लेती है। यहाँ की गंगा आरती की चर्चा पूरी दुनिया में है, लेकिन मेरे लिए यहाँ की सबसे खास बात है—गंगा के बीचों-बीच स्थापित भगवान शिव (महादेव) की विशाल मूर्ति।
लहरों के बीच शांत बैठे महादेव को देखना आपको सिखाता है कि चाहे बाहर कितना भी शोर हो, भीतर से शांत कैसे रहा जाता है। वहां के घाट पर बैठकर जब आप शाम की आरती की घंटियां सुनते हैं, तो मन के सारे बोझ उतर जाते हैं। मुझे लोगों से बहुत जल्दी जुड़ाव हो जाता है, और उस घाट पर अजनबियों के साथ बैठकर आरती गाना मुझे एक अलग ही इंसानियत के धागे में पिरो देता है।
त्रिवेणी घाट: आस्था का महासंगम
ऋषिकेश का दिल है त्रिवेणी घाट। यहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम माना जाता है। सुबह-सुबह यहाँ श्रद्धा की डुबकी लगाते लोग और शाम को दीपदान का नज़ारा दिल जीत लेता है। यहाँ की भीड़ में भी एक अजीब सी शांति है। यहाँ बैठकर आपको अहसास होता है कि हमारी संस्कृति कितनी महान है।
श्मशान घाट: जीवन का कड़वा मगर शांत सच
ऋषिकेश में एक तरफ जहाँ जीवन का उत्सव है, वहीं दूसरी ओर श्मशान घाट हमें जीवन की नश्वरता की याद दिलाता है। गंगा किनारे जलती चिताएं और वहां पसरी खामोशी एक अजीब सा वैराग्य पैदा करती है। एक मुसाफिर होने के नाते, यह जगह मुझे याद दिलाती है कि हमारे पास जो भी पल हैं, उन्हें खुलकर जीना चाहिए और नफरत के बजाय प्यार बांटना चाहिए।
आश्रम, धर्मशालाएं और वह 'Stone Beach'
ऋषिकेश के आश्रमों और धर्मशालाओं की सादगी मुझे हमेशा प्रभावित करती है। यहाँ की दीवारों में एक अलग तरह की शांति बसी है। और फिर आता है ऋषिकेश का वह मशहूर पत्थरों वाला बीच (Stone Beach)। यहाँ रेत नहीं, बल्कि गंगा के बहाव से तराशे गए सुंदर और चिकने पत्थर हैं। यहाँ पत्थरों को एक के ऊपर एक रखकर मीनार बनाना (Stone Balancing) मेरा पसंदीदा काम है। पानी के किनारे बैठकर पत्थरों से टकराती लहरों की आवाज़ सुनना किसी संगीत से कम नहीं है।
एक छोटी सी पहल: A2D Foundation
अपनी इन यात्राओं के दौरान, मैं अपनी संस्था A2D Foundation के माध्यम से कुछ बच्चों को भी इन जगहों पर ले जाता हूँ। उन बच्चों के लिए जानकी झूला की ऊँचाई देखना या गंगा किनारे पत्थरों से खेलना एक सपने जैसा होता है। उनकी आँखों की खुशी मुझे यह एहसास दिलाती है कि मेरा सफर सफल रहा।
ऋषिकेश सिर्फ घूमने की जगह नहीं है, यह खुद को खोजने की जगह है। चाहे आप अकेले आएं या अपनों के साथ, यहाँ की मिट्टी आपको कुछ न कुछ सिखा कर ही भेजेगी।