एक अनकही दास्तां: जन्मदिन और मोहब्बत
आज वो मेरे बिल्कुल करीब थी, जैसे रोज होती है। अचानक कहने लगी— "मैं अपना जन्मदिवस नहीं मनाऊंगी।"
मैंने पूछा क्यों? जवाब में सिर्फ चुप्पी थी। मेरी नज़रें बस उसी पर टिकी थीं। मैंने फिर प्यार से कहा— "बाबू, क्या हुआ बता न?"
"जब मेरी ख़ुशी से कोई खुश नहीं होता, तो मैं खुश क्यों होऊँ?" — उसकी ये बात मुझे अंदर तक हिला गई।
मैंने फिर पूछा— "क्या हुआ है बता न बाबू?" पर जवाब में सिर्फ खामोशी रही। मैंने उदास होकर कहा— "क्या मेरे लिए भी खुश नहीं होगी?"
उसका जवाब आया— "तेरे सामने तो खुश हूँ न, अब और कितना खुश होऊँ?" यह सुनकर दिल कांप गया।
"देख पागल... अगर तू खुश है तो मैं खुश हूँ।"
जैसे ही मैं उदास होकर उससे दूर होने को हुआ, अचानक उसकी आँखें भर आईं। मेरा दिल भी भर आया। झट से उसे गले लगा लिया, माथे को चूमा और सीने से लगा लिया।
मैंने कहा— "पागल, मैं हूँ न। हमेशा तेरे साथ हूँ और तेरी खुशी ही मेरी खुशी है। तू ही तो कहती है कि मैं तेरा सबकुछ हूँ।"
I Love You... समझी पगली? I only need you.
सिर्फ तेरा साथ! और तुझे पता है न कि मैं तुझे कितना प्यार करता हूँ?
हम आपका Birthday ज़रूर मनाएंगे... OK बाबू? ❤️
सिर्फ तेरा साथ! और तुझे पता है न कि मैं तुझे कितना प्यार करता हूँ?
हम आपका Birthday ज़रूर मनाएंगे... OK बाबू? ❤️
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