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एक उलझे अज़नबी से राह चलते मुलाक़ात ।

एक अजनबी: वो लड्डू और बातें

The Encounter 1

मैं दुकान से नान लेके अपने दोस्त के घर जा रहा था, तभी मेरे सामने से चलता हुआ एक जवान लड़का आ रहा था। उसने मुझे कुछ कहा पर मैं सुन नहीं पाया। मैंने उसकी ओर रुख किया और हमारी नजरें टकराईं। उसने फिर कुछ कहा, लेकिन इस बार भी मैं उसकी भाषा समझने में नाकामयाब रहा।

"आप कौन सी क्लास (कक्षा) में हो?" — उसने पूछा। मैंने कहा कि मैं 2nd Year कर रहा हूँ। फिर वो अंग्रेज़ी में कुछ धीरे से बोला।

अफ़सोस था कि मैं उसकी बातें समझ नहीं पा रहा था, लेकिन वह मुस्कुराया और उसने मुझे अपने साथ चलने का प्रस्ताव दिया। वह मुझे यह कहते हुए साथ ले गया कि— "एक-एक लड्डू खाएंगे, हम तो बस यहाँ दोस्ती निभा रहे हैं।"

The Conversation

कुछ कदम दूर एक हलवाई की दुकान थी। उसकी जेब में मात्र 12 रुपए थे। उसने गिना और दो मोतीचूर के लड्डू लिए। मुझे लगा था कि शायद कोई लुटेरा होगा, लेकिन मैं गलत था। उसके हाव-भाव ऐसे थे जैसे वह मेरा बहुत पुराना साथी हो।

उसने मुझे एक लड्डू दिया और बोला— "ये आपके हिस्से का था, सो आपको मिल गया।"

उसके कपड़े सीमेंट से सने थे। पूछने पर पता चला कि वह बिल्डिंग्स का ठेका लेता है। वह बोला कि उसने एक "Imported Person" के साथ काम किया था जिसने उसे धोखा दिया। उसने बताया— "मैं एक फ्लोर नहीं, पूरी बिल्डिंग का ठेका लेता हूँ।"

जाते-जाते वह मुड़ा और बोला— "यहाँ तक आने के लिए धन्यवाद।" मैंने भी उसे उस लड्डू के लिए शुक्रिया कहा।

उसकी बातें, उसका अंग्रेज़ी बोलना और वो अजनबी एहसास... मुझे सोचने पर मजबूर कर गया कि आखिर वो अजनबी कौन था जो बिना नाम-पता बताए एक लड्डू खिला गया। वह दुनिया में एक दम अलग था।
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