एक अजनबी: वो लड्डू और बातें
मैं दुकान से नान लेके अपने दोस्त के घर जा रहा था, तभी मेरे सामने से चलता हुआ एक जवान लड़का आ रहा था। उसने मुझे कुछ कहा पर मैं सुन नहीं पाया। मैंने उसकी ओर रुख किया और हमारी नजरें टकराईं। उसने फिर कुछ कहा, लेकिन इस बार भी मैं उसकी भाषा समझने में नाकामयाब रहा।
अफ़सोस था कि मैं उसकी बातें समझ नहीं पा रहा था, लेकिन वह मुस्कुराया और उसने मुझे अपने साथ चलने का प्रस्ताव दिया। वह मुझे यह कहते हुए साथ ले गया कि— "एक-एक लड्डू खाएंगे, हम तो बस यहाँ दोस्ती निभा रहे हैं।"
कुछ कदम दूर एक हलवाई की दुकान थी। उसकी जेब में मात्र 12 रुपए थे। उसने गिना और दो मोतीचूर के लड्डू लिए। मुझे लगा था कि शायद कोई लुटेरा होगा, लेकिन मैं गलत था। उसके हाव-भाव ऐसे थे जैसे वह मेरा बहुत पुराना साथी हो।
उसके कपड़े सीमेंट से सने थे। पूछने पर पता चला कि वह बिल्डिंग्स का ठेका लेता है। वह बोला कि उसने एक "Imported Person" के साथ काम किया था जिसने उसे धोखा दिया। उसने बताया— "मैं एक फ्लोर नहीं, पूरी बिल्डिंग का ठेका लेता हूँ।"
जाते-जाते वह मुड़ा और बोला— "यहाँ तक आने के लिए धन्यवाद।" मैंने भी उसे उस लड्डू के लिए शुक्रिया कहा।
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