आज का दिन ऐसा है कि सम्पूर्ण विश्व का उत्साह जाग उठेगा कि पर्यावरण बचाना है, खासकर उन भारतीय लोगों के लिए जो पर्यावरण को नष्ट करने पर प्रथम स्थान पर हैं। यह जुनून बस आज का होगा और कल से ठंडा हो जायेगा।
"आज हँसी आती है इन सब को देख कर ऐसा लगता है बेटी की शादी है और एक दिन का बोझ है भाई बस किसी तरह उतार दो अगले साल फिर से मेहनत होगी।"
मानसिकता और बदलाव
सिर्फ वायु ही नहीं प्रदूषित बल्कि हमारी धरती जो हमे खाना देती है, जिसे हम अपनी धरती माँ कहते हैं, उनको भी नहीं छोड़ते। प्लास्टिक आदि फेंक कर उसे गन्दा करते हैं। दोस्तों ये सभी बात मैं लोगों को बताता हूँ मगर कुछ लोग मुझे बच्चा समझ के ध्यान नहीं देते।
मैं पुनः उस पेड़ से मिलने जाने वाला हूँ जिसकी बातों से मैं काफी शर्मिंदा हुआ था, इस बार उसे बताने कि मैं उसकी व्यथा लिखने को तैयार हूँ। पाठक गण, मुझे आप लोगों से यही आशा है कि आप लोग मेरी इस बात को लोगों तक पहुँचाएंगे।
यह बात किसी राजनीति की नहीं बल्कि पर्यावरण और जनहित की है।
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