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भारतीय जवान औरंगज़ेब की शहादत

मानवता, शहादत और एक सच्चा सिपाही

मानवता न जाने कहाँ खो सी गयी है, इंसान इंसानियत भूलता जा रहा है और हैवानियत पे उतर रहा है।



शहीद औरंगज़ेब की दास्तां

आखिर क्या गलती थी उस कश्मीरी औरंगजेब की? बस इतनी सी कि वो भारतीय खेमे का एक जांबाज सिपाही था जो दुश्मनों के आगे झुका नहीं। गुरुवार के दिन इस जवान का अपहरण कर लिया जाता है और फिर देर रात उसकी लाश मिलती है।

"मैं इस कदर देश के लिए फ़ना हो जाऊंगा... खैर वो खुश तो बहुत हुआ होगा कि आखिरकार मेरी शहादत भारत के सैनिक के रूप में हो रही है, काफिरों की मौत तो नहीं मिली मुझे।"

कितनी रोई होगी उसकी मां अपने बेटे के लिए, क्या गुजरी होगी उस बहन पर जो एक दिन पहले गुहार लगा रही थी कि 'मेरे भाई को छोड़ दो'। फिर भी दया नहीं आई इन हैवानों को। ईद मनाने घर को लौट रहा था वो, थोड़ा ही न जानता था कि दो देशों की दुश्मनी का ये शिकार हो जायेगा।

एकता का संदेश

अब शायद यकीन हो रहा होगा हमारे देश के विद्वान दिग्गजों को कि हर कश्मीरी मुसलमान पाकिस्तानी या देशद्रोही नहीं होता। मेरे भारत के भाइयों, हमें आतंकवाद खत्म करना है, इंसानियत नहीं। देश द्रोह खत्म करना है, देश वासी नहीं।

NOTE: यह ब्लॉग किसी एक के हित में नहीं, बल्कि इसलिए लिखा गया है ताकि हमारे आस-पास रह रहे लोगों को—चाहे वे किसी भी धर्म से हों—ठेस न पहुँचे। क्या पता उनके दिल में हमसे ज़्यादा देश भक्ति की भावना हो।

अपना धर्म सिर्फ 'भारतीय' बताएं, भारत स्वर्ग बन जायेगा।

India Pride
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